Quotes worth a Million

इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर
यह सोचना उचित होगा चंद लम्हे
के जिस राह पे चले थे हमारे नेता
क्या आज उसी राह पे खड़े हम हैं

क्या बदल गयी हैं हमारी दृष्टिकोण
या हम चाहेते हैं कुछ और
आज देश की हालत को लेकर
जनाब ज़रा फरमाइए गौर

याद कीजिये उन लोगों की बलिदान
जिसके बुनियाद पे कड़ी हैं हिंदुस्तान
क्या इसीलिये हमें मिली ये आजादी
के हम पैदा कर पाए सैंकड़ों शैतान

नारी के प्रति कहा गया वोह सम्मान
जों घूस ना ले ऐसा हैं क्या कोई इंसान
एक नेता जों लोगों के लिए काम करे
और गर्व से कहे मेरा भारत महान

फिर भी निराशा के बदले
मेरा यह विश्वास हैं
के एक सुनेहरा भारत बनाने का
चाबी हमारे पास हैं

जै हिंद

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Comments on: "एक प्रतिबिम्बन" (3)

  1. Very apt! I wish the PM read out this poem instead of another ornate speech.

  2. Wonderful Niks! Wish our people understood this

  3. hi niks,

    very good , bahuth achha lika hai.

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