इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर
यह सोचना उचित होगा चंद लम्हे
के जिस राह पे चले थे हमारे नेता
क्या आज उसी राह पे खड़े हम हैं
क्या बदल गयी हैं हमारी दृष्टिकोण
या हम चाहेते हैं कुछ और
आज देश की हालत को लेकर
जनाब ज़रा फरमाइए गौर
याद कीजिये उन लोगों की बलिदान
जिसके बुनियाद पे कड़ी हैं हिंदुस्तान
क्या इसीलिये हमें मिली ये आजादी
के हम पैदा कर पाए सैंकड़ों शैतान
नारी के प्रति कहा गया वोह सम्मान
जों घूस ना ले ऐसा हैं क्या कोई इंसान
एक नेता जों लोगों के लिए काम करे
और गर्व से कहे मेरा भारत महान
फिर भी निराशा के बदले
मेरा यह विश्वास हैं
के एक सुनेहरा भारत बनाने का
चाबी हमारे पास हैं
जै हिंद
Advertisement
Filed under: Uncategorized
Very apt! I wish the PM read out this poem instead of another ornate speech.
Wonderful Niks! Wish our people understood this
hi niks,
very good , bahuth achha lika hai.